Wednesday, 9 April 2008

ढलता हुआ सूरज!

ढलते हुए सूरज की तरहा ज़िंदगी अगर बहुत खूबसूरत होती टू क्या ? इतना गुरुर और तपश हममे होती टू क्या ? गुरुर और अपश तो सूरज के साथ डूब जाता है , लेकिन ज़िंदगी एक पाल की मोहताज नहीं ...

1 comment:

Jyoti said...

Wah Wah!!

Welcome angel from heaven to the blogosphere :)

p.s.and u better visit my space!